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जून, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

धर्म, आस्था एवं स्थानीय देवता

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धर्म (1) हिन्दू - हिमाचल प्रदेश के करीब 96% लोग हिन्दू धर्म को मानते वाले हैं| हिन्दू लोग दीपावली, दशहरा, शिवरात्रि, जन्माष्टमी, होली, रामनवमी इत्यादि त्योहार हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं| कुल्लू का दशहरा, मंडी की शिवरात्रि, सुजानपुर, टिहरा की होली, हिमाचल प्रदेश के प्रसिध्द त्योहार हैं| हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से जाना जाता है| (2) मुस्लिम - हिमाचल प्रदेश की 1.72% जनसंख्या मुस्लिम है| यह प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक समूह है| अधिकतर मुस्लिम जाति का संबंध चम्बा की गुर्जर जनजाति से है| सबसे अधिक मुस्लिम चम्बा जिले में पाए जाते हैं| शिमला में स्थित जामा मस्जिद प्रसिध्द है| सिरमौर की मिश्रवाला में मदरसा है| (3) बौध्द - बौध्द हिमाचल प्रदेश का तीसरा बड़ा धार्मिक समूह है| यह प्रदेश में केवल 1.23% है| सबसे अधिक बौध्द अनुयायी किन्नौर जिले में हैं| इसके बाद लाहौल-स्पीति का स्थान आता है| धर्मशला में तिब्बती, बौध्द धर्म गुरु दलाईलामा का निवास स्थान है| पद्मसंभव एक प्रसिध्द बौध्द भिक्षु थे| ताबो गोम्पा विश्व का सबसे पुराना गोम्पा है| यह 996 ई. में स्थापित किया गया| इसे '...

हिमाचल प्रदेश की भाषाएं एवं लिपि

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भाषाएं एवं लिपि (i) पहाड़ी भाषा की उत्पति-  हिमाचल प्रदेश की भाषा को जो की यहाँ के 90% लोग बोलते हैं| पश्चिमी पहाड़ी भाषा के रूप में जाना जाता है| पश्चिमी पहाड़ी भाषा उतराखंड के जौनसार बाबर से लेकर जम्मू-कश्मीर में भद्रवाह तक बोली जाती है| लगभग 30 स्पष्ट बोलियाँ इस क्षेत्र में खोजी गई हैं| यहाँ की बोलियों का वर्गीकरण जॉर्ज ए. ग्रियस्रन ने अपनी पुस्तक "भारत का भाषिक सर्वेक्षण" में दिया था| उन्होंने बिलासपुरी और काँगडी को पंजाबी भाषा से संबद्ध किया था| जिसे बाद में पहाड़ी भाषा माना गया| जॉर्ज ए. ग्रियस्रन ने पहाड़ी भाषा का जन्म दर्दी और पैशाची से माना है, जबकि डॉ. हरदेव बाहरी, डॉ. भोलानाथ तिवारी, डॉ. उदयनारायण तिवारी और डॉ. धीरेन्द्र वर्मा के अनुसार पहाड़ी भाषा का विकास शैरसेनी नागर अपभृंश से हुआ है| (ii) मुख्य पहाड़ी बोलियाँ-  हिमाचल प्रदेश में 88.77% लोग पहाड़ी (हिंदी) और 6.83% लोग पंजाबी भाषा बोलते हैं| बाकी लोग तिब्बती हिमालयन भाषा बोलते हैं| सिरमौर-धारटी - सिरमौर के (गिरी आर) धारती क्षेत्र में धारती बोली बोली जाती है|  विशवाई - सिरमौर के गिरिपाल क्षेत्र में ...

मानव भूगोल एवं जननांकीय आँकड़े हिमाचल प्रदेश

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मानव भूगोल एवं जननांकीय आँकड़े (i) हिमाचल प्रदेश की जनगणना (2011) के आँकडें हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या 1901 में 19,20,294 से बढ़कर 1951 में 23,85,981 और 1971 में बढ़कर 34,60,434 हो गई| वर्ष 2011 में हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या 68,64,602 हो गई| हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या में 1901 से 1911 के बीच 1.22% की गिरावट दर्ज की गई| हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या में सर्वाधिक 23.71% की वृध्दि 1971 से 1981 के बीच दर्ज की गई| हिमाचल प्रदेश का लिंग अनुपात सबसे कम 1901 में 884 दर्ज किया गया जो 1951 में बढ़कर 912 और 1971 में बढ़कर 958 हो गया| वर्ष 2011 में हिमाचल प्रदेश का लिंग अनुपात 972 है| हिमाचल प्रदेश का जनघनत्व 1901 में 34 से बढ़कर 2011 में 123 हो गया है| जनसंख्या एवं दशकीय वृद्धि दर- लाहौल-स्पीति की जनसंख्या में (2001-2011) पिछले दशक में -5.0% की गिरावट दर्ज की गई| उनकी जनसंख्या 2001 में 33,244 से घटकर 2011 में 31,569 रह गई है| हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या (2011 जनगणना के अनुसार) - 68,64,602 पुरुष जनसंख्या - 34,81,873 महिला जनसख्या - 33,82,729 हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या भारत की जनसंख्या का 0....

हिमाचल में मौसम एवं जलवायु

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"मौसम एवं जलवायु" हिमाचल प्रदेश के जलवायु खंड-  हिमाचल प्रदेश की जलवायु इसके दक्षिणी तथा दक्षिणी-पशिचमी हिस्सों में उष्ण तथा उपोष्ण आर्द्र कटिबंधीय मध्यवर्ती भाग में शीतोष्ण आर्द्र जबकि उतरी-पूर्व हिस्सों में समशीतोष्ण कटिबंध से लेकर अल्पाइन प्रकार की है| जलवायु परिस्थितियों में यह अंतर मुख्यतः समुद्र तल से ऊँचाई के साथ संबंधित है| हिमाचल प्रदेश में तापमान, जलवृष्टि एवं अन्य मौसम तथा जलवायु संबंधी तत्वों को ध्यान में रखते हुए तीन जलवायु कटिबंध निम्नलिखित हैं- निम्नवर्ती उष्ण तथा उपोष्ण जलवायु कटिबंध-  यह जलवायु हिमाचल प्रदेश के दक्षिणी तथा दक्षिणी-पशिचमी हिस्सों में देखने को मिलती है| इस जलवायु प्रदेश की स्थिति 350 से 1500 की ऊँचाई वाले क्षेत्रों में देखने को मिलती है| निम्नवर्ती शिवालिक पहाड़ियों, बाहरी हिमालयन श्रेणियों तथा निम्नवर्ती हिमालयन क्षेत्र इस उष्ण एवं उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु के प्रमुख भौगोलिक क्षेत्र हैं| धरातलीय उच्चावच एवं ऊँचाई के अनुसार इस जलवायु प्रदेश को निम्नलिखित दो उपप्रदेशो में विभाजित किया गया है- 1.1 उष्ण कटिबंधीय जलवायु  1...

हिमाचल प्रदेश की मिट्टियाँ

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(i) हिमाचल प्रदेश की मिट्टियाँ-  हिमाचल प्रदेश की मिट्टी को 5 खण्डों में बाँटा जा सकता है- (1) निम्न पहाड़ी मिट्टी-  इस खंड में समुद्रतल से 1000 मी. तक ऊँचाई वाले क्षेत्र आते हैं| सिरमौर की पौंटा घाटी, नाहन, बिलासपुर, ऊना, हमीरपुर, काँगड़ा के मैदानी भाग, मंडी की बल्हघाटी, चम्बा घाटी क्षेत्र इसके अंतर्गत आते हैं| इस खंड की मिट्टी चिकनी व पथरीली मिट्टी का मिश्रण है| इसमें कार्बन और नाइट्रोजन 10:1 के अनुपात में पाया जाता है| इसमें धान, मक्की, गन्ना, अदरक, नींबू व आम की पैदावार की जाती है| (2) मध्य पहाड़ी मिट्टी खंड-  इस खंड में समुद्रतल से 1000 से 1500 मीटर तक ऊँचाई वाले क्षेत्र आते हैं| इस प्रकार की मिट्टी सिरमौर के पच्छाद, रेणुका क्व निम्न भाग, अर्की, मंडी के जोगिंदरनगर, पालमपुर, डलहौज़ी आदि क्षेत्रों में पाई जाती है| इस खंड की मिट्टी दोमट प्रकार की है और इसका रंग हल्का स्लेटी भूरा है| इस मिट्टी में कार्बन और नाइट्रोजन की मात्रा 10 और 12 के अनुपात में पाई जाती है| यह मिट्टी और आलू की पैदावार के लिया उपयोगी है| (3) उच्च पहाड़ी मिट्टी खंड-  इस खंड में समु...

हिमाचल प्रदेश के ग्लेशियर

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“ग्लेशियर” हि.प्र.में ग्लेशियर को स्थानीय भाषा में 'शिगड़ी' कहते हैं| ग्लेशियर को हिमनद के नाम से भी जाना जाता है|ग्लेशियर नदियों को पानी देते हैं व् नदियों के उदगम का प्रमुख स्त्रोत हैं| चंद्रा घाटी के ग्लेशियर (लाहौल-स्पीति):- बड़ा शिगड़ी - यह हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा ग्लेशियर है| इस ग्लेशियर की लम्बाई 25किमी है और इस ग्लेशियर से चंदरताल झील बनी है| गेफांग - लाहौल के देवता गेफांग के नाम पर इसका नाम पड़ा है|गेफांग पर्वत चोटी को 'लाहौल का मणिमहेश’ भी कहा जाता है| इसकी आकृति स्विट्ज़रलैंड के 'मैटर हॉर्न' के जैसी है| चन्द्रा - यह ग्लेशियर चन्द्रा नदी एवं चंदरताल झील की उत्पत्ति का स्त्रोत है| यहाँ कोकसर के रास्ते पहुँचा जा सकता है| कुल्टी - कोकसर के पास स्थित यह ग्लेशियर रोहतांग पार करने पर दिखता है| इसके अलावा:-  छोटा शिगड़ी  पाचा  शिप्टिंग शामुद्री  बोलूनाग  तापन  दिंगकर्मो शिल्ली  भागा घाटी के ग्लेशियर(लाहौल-स्पीति):- भागा हिमनद - इस ग्लेशियर तक 'कोकसर एवं ताण्डी' के रास्ते पहुंचा जा सकता है| लेडी ऑफ़ केलांग हिमनद - 606...

हिमाचल प्रदेश की झीलें with short tricks

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झीलें  (i) बनावटी (कृत्रिम झीलें) गोविन्द सागर झील- गोविन्द सागर हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है| यह झील बिलासपुर जिले में सतलुज नदी पर बनी है| इस झील की लंबाई 88 किमी.है| इस झील का क्षेत्रफल 169 वर्ग किमी.है| इस झील का क्षेत्रफल 169 वर्ग किमी. है| बनावटी इस पर 226 मीटर ऊँचा भाखड़ा बाँध बनाया गया है जो 1963 में बनकर तैयार हुआ|  पौंग झील - यह झील काँगड़ा झीले में है| यह झील व्यास नदी पर बनी हुए है| इसकी लम्बाई 42 किमी है | इस झील के पास पौंग बाँध भी है, जो 1960 में बना था| यह झील महाराणा प्रताप सागर के नाम से जानी जाती है| 1983 में इसे अभ्यारण्य घोषित किया गया है| वर्ष 1994 में इसे राष्ट्रीय स्तर की तारभूमि और 2002 में इसे रामसर साइट घोषित कर दिया गया|  पण्डोह झील - यह झील मंडी जिले में व्यास नदी पर बनी हुई है| इसकी लम्बाई 14 किमी. है और यह राष्ट्रीय राजमार्ग-21 के किनारे है| सतलुज व्यास लिंक द्वारा सुंदरनगर की बल्क घाटी को सिंचाई सुविधा दी जाती है| चमेरा झील- चम्बा जिले में चम्बा-पठानकोट मार्ग पर रावी नदी पर चमेरा झील का निर्माण किया गया है| इस पर 54...

हिमाचल प्रदेश के झरने व चश्में with tricks

“ झरने / चश्मे ( गर्म पानी के )”   कुल्लू ·          क - कुल्लू ·          क - कसोल ( पार्वती नदी )             Short Trick :-क - क - क - क - किरन ( शाहरुख़ खान का famous Dialogue ·          क - कलथ ( व्यास नदी )               है जिसमें ऐसा प्रतीत ह...