हिमाचल प्रदेश का मध्यकालीन इतिहास

मध्यकालीन आक्रमणकारी:- 

महमूद गजनवी - मेहमूद गजनवी ने भारत  पर 17 आकर्मण किए थे| महमूद गजनवी ने 1099 ई. में आनंदपाल को हारने के बाद नगरकोट पर आकर्मण किया और उसके खजाने को लूटा | नगरकोट किल्ले पर तुर्कों पर कब्ज़ा 1043 ई. तक रहा जिसके बाद दिल्ली के तोमर राजा महिपाल ने नगरकोट से गजनवी शासन की समाप्ति की| 


  • 1001ई. में महमूद गजनवी के आकर्मण के समय उसका किस हिन्दू शासक से सामना हुआ - जयपाल 
  • 1009ई. में किस आक्रमणकारी ने काँगड़ा पर आकर्मण किया व  मंदिरों को तोडा - महमूद गजनवी 
  • 1001ई. में राजा जयपाल को हारने वाला अफ़ग़ान बादशाह कौन था - महमूद गजनवी
  • महमूद गजनवी ने हिमाचल प्रदेश के किस किल्ले पर 1009 A.D. में आकर्मण किया था - नगरकोट(काँगड़ा)
  • 1009ई. में महमूद गजनवी के आकर्मण के समय नगरकोट का शासक कौन था - जयचंद (जगदीश चंद)
  • गजनवी का कौन सा पहला सुल्तान था जिसने 10वीं  सदी के अंत में हिन्दू शाहिया वंश के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण करना प्रारम्भ किया था - सुबुक्तगीन
  • नगरकोट का किल्ला  कब तक तुर्कों (महमूद गजनवी) के कब्जे में रहा - 1043ई. तक 
  • शाहिया राजवंश के हिन्दू राजा जयपाल को गजनी के शासक सुबुक्तगीन के साथ एक अपमानजनक संधि करने के लिए क्यों बाध्य होना पड़ा - बर्फीले तूफान के कारण
  • महमूद गजनवी की सेना ने काँगड़ा के कौन से मंदिर को नष्ट किया - बृजेश्वरी 



सल्तनत काल (1206ई.  -  1526ई.)

सल्तनत काल में गुलाम वंश (1206ई. - 1290ई.) और खिलजी वंश (1290ई. - 1320ई.)

तुगलक वंश - 

मुहम्मद बिन तुगलक - 1337ई. में मुहम्मद बिन तुगलक ने नगरकोट के राजा पृथ्वीचंद को पराजित करने के लिए सेना भेजी थी| 
फिरोजशाह तुगलक (1351 - 1388ई.) - 1360ई. में काँगड़ा के राजा रूपचंद ने सेना लेकर दिल्ली तक के मैदानी भागों को लूटा| इससे क्रोधित होकर फिरोजशाह तुगलक ने काँगड़ा के राजा रूपचंद को सबक सिखाने के लिए 1361ई. ने नगरकोट में आकर्मण कर घेरा डाला|  

तैमूरलंग का आकर्मण - 1398ई. में मंगोलों का आकर्मण तैमूरलंग के नेतृत्व में हुआ| सैय्यद वंश और लोदी वंश ने पहाड़ी राज्यों पर आधिपत्य  ज़माने का कोई प्रयास नहीं किया| 

  • 14वीं शताब्दी के अंत में काँगड़ा पर हमला करने वाला मुस्लिम आक्रमणकारी कौन था - फिरोजशाह तुगलक 
  • काँगड़ा का कौन सा राजा 1360ई. के आसपास अभियान पर निकला और दिल्ली को लगभग जीत ही लिया - रूपचंद
  • तैमूरलंग ने किस वर्ष काँगड़ा पर आकर्मण कर मंदिरों को तहस-नहस किया - 1398 - 99ई.
  • वह मुसलमान कवी कौन थे जिन्होंने फिरोजशाह तुगलक के शासनकाल में ज्वालामुखी मंदिर में रखी हुई संस्कृत की पुस्तकों का  फ़ारसी में अनुवाद किया था - आजजुद्दीन खालिद खानी
  • कौन सा शासक काँगड़ा पर कब्जे के उपरान्त ज्वालामुखी मंदिर में रखी हुई संस्कृत की पुस्तकों को फ़ारसी में अनुवाद करने के लिए ले गया - फिरोजशाह तुगलक
  • 1351ई. में किस कटोच राजा ने फिरोजशाह तुगलक के 6 माह तक नगरकोट किल्ले पर घेरा डालने के बाद समर्पण कर दिया - राय रूपचंद
  • किस तुगलक शासक ने 1337ई. में नगरकोट के किल्ले को जीत लिया, लेकिन बाद में उसे खो दिया - मुहम्मद बिन तुगलक
  • किस मुस्लिम दरबारी ने सर्वप्रथम नगरकोट के बारे में वर्णन किया था - उतबी 
  • नूरपुर का कौन सा शासक सिकंदर लोदी का समकालीन था - भीमपाल
  • मुहम्मद बिन तुगलक ने काँगड़ा दुर्ग को कब जीता - 1337ई. में   
  • मुहम्मद बिन तुगलक के आकर्मण के समय काँगड़ा का राजा कौन था - पृथ्वीचंद 

मुग़ल काल (1526 - 1857ई.) 

बाबर - बाबर ने 1525  में काँगड़ा के निकट मलौट में अपनी चौकी स्थापित की| बाबर ने 1526 ई. में पानीपत  प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुग़ल वंश की स्थापना की|  

अकबर - अकबर ने 1526 ई. में सिकंदर शाह को पकड़ने के लिए नूरपुर में अपनी सेना भेजी क्योंकि नूरपुर के राजा भक्तमल की सिकंदर शाह से दोस्ती थी| अकबर पहाड़ी राज्यों को अपनी अधीनता स्वीकार करने के लिए उनके बच्चों या रिश्तेदारों को दरबार में बंधक के तौर पर रखता था| अकबर ने काँगड़ा के राजा जयचंद को बंधक बनाया| अकबर ने 1572 ई  में टोडरमल को पहाड़ी रियासतों की जमीनें लेकर एक शाही जमींदारी स्थापित करने के लिए नियुक्त किया| चम्बा का राजा प्रताप सिंह वर्मन अकबर का समकालीन था| सिरमौर का राजा धर्म प्रकाश अकबर का समकालीन था|   

जहांगीर - जहांगीर 1605 ई. में गददी पर बैठा| जहांगीर को 20 नवंबर 1620 को काँगड़ा किल्ले पर कब्जे की खबर मिली|  काँगड़ा किल्ले को जितने में नूरपुर के राजा सूरजमल के छोटे भाई जगत सिंह ने मुगलों की मदद की| जहांगीर 1622 ई. में धमेरी(नूरपुर) आया| उसने अपनी पत्नी नूरजहां के नाम पर धमेरी का नाम नूरपुर रखा| काँगड़ा किल्ले के एक दरवाजे का नाम "जहांगीरी दरवाजा" रखा गया| जहाँगीर ने काँगड़ा किल्ले के अंदर एक मस्जिद का निर्माण करवाया|  जहांगीर के समय चम्बा के राजा जनार्धन और जगत सिंह के बीच "ढलोग" युद्ध हुआ जिसमें जगत सिंह विजय हुआ| जगत सिंह मुग़लों का वफादार था| सिरमौर का राजा बुद्धि प्रकाश जहाँगीर का समकालीन था| काँगड़ा किल्ले का पहला मुग़ल किलेदार नवाब अलीखान था| 

शाहजहां - शाहजहां शासनकाल में नवाब असदुल्ला खान और कोच कुलीखान काँगड़ा किल्ले के मुग़ल किलेदार बने| कोच कुलीखान 17 वर्षों तक किलेदार रहा| उसे बाणगंगा नदी के पास दफनाया गया था| सिरमौर का राजा मन्धाता प्रकाश शाहजहां  समकालीन था| उसने मुग़लों के गढ़वाल अभियान में कई बार सहायता की| शाहजहाँ के पुत्र का नाम मुराद बख्श था|  

औरंगजेब
              चम्बा(चतर सिंह) - 1678 में औरंगजेब ने चम्बा रियासत के सभी मंदिरों को गिराने की आज्ञा दी| चतर                  सिंह ने उसके उत्तर में राज्य के सभी मंदिरों पर एक सुनहरी बुर्जी सजाने के आज्ञा दी| 

              बुशहर - औरंगजेब ने बुशहर के राजा केहरी सिंह को  छत्रपति का ख़िताब प्रदान किया था|   

              सिरमौर - सिरमौर रियासत पर मुग़लों की संप्रभुता थी| औरंगजेब ने सुभग प्रकाश को जगत सिंह के                    पुत्र राजरूप की सहायता (गढ़वाल पर आकर्मण करने की समय) करने के लिए कहा| 
                                  1707 ई. में औरगज़ेब की मृत्यु के बाद मुग़लों का पतन शुरू हुआ| 
                                  नवाब सैफ अली खान काँगड़ा किल्ले के अंतिम मुग़ल किलेदार थे| 

  • हिमाचल प्रदेश की किस देशी रियासत ने कभी सम्राट अकबर का आधिपत्य स्वीकार नहीं किया। यद्यपि उसकी सेना ने उसके काफी बड़े भाग पर कब्ज़ा कर लिया था -काँगड़ा
  • पहला पर्वतीय सरदार जिसने औरंगज़ेब के मृत्यु और मुग़ल साम्राज्य के खंडित होने के बाद अपने पैतृक अधिकार क्षेत्र काँगड़ा पर अपना आधिपत्य पुनः स्थापित किया था - राजा घमण्ड चंद| 
  • अपने आधिपत्य की स्वीकृति के सूचक के रूप मे वार्षिक नज़राना लेने के अलावा अकबर ने पहाड़ी रियासतों द्वारा आज्ञा पालन को सुनिश्चित करने के लिए क्या तरीका अपनाया था ...मुग़ल दरबार मे बंदक को रखना|                       
  • अहमदशाह अब्दाली ने काँगड़ा के किस राजा को महाराज उपाधि प्रधान की थी ...घमंडचंद
  • पंजाब की पहाड़ी रियासतों के जो राजकुमार मुग़ल दरबार मे बंदक होते थे उन्हें 'मियाँ' की उपाधि किस शासक द्वारा दी, बताई जाती है...जहांगीर                    
  • 1588 -89 ईस्वी मे काँगड़ा के किस राजा ने जम्मू से काँगड़ा तक के सभी पहाड़ी प्रमुखों को अकबर के विरुद्ध संगठित किया था ...विधिचंद्र|
  • किस चमत्कार ने मुग़ल सम्राट अकबर को जमलू से शाही महसूल के रूप मे वसूल किये गए स्वर्ण सिक्के को लौटने हेतु विवश कर दिया था ...आगरा शहर का बर्फ़बारी से ढकना|  
  • किस रियासत के शासक ने मुग़ल सम्राट जहांगीर को काँगड़ा का किला हस्तगत करने मे मदद की ...नूरपुर
  • शाहजहां ने 1645 ई. मे नूरपुर रियासत के किस नरेश को बलख के उजबेकों को नियंत्रित करने के लिए भेजा...जगत सिंह
  • दाराशिकोह की पत्नी ने किस रियासत के राजा को अपने बेटे की तरह माना...नूरपुर|      
  • मुग़ल सम्राट अकबर ने 1572 ई मे जागीर के रूप मे काँगड़ा किसे प्रदान  किया ...बीरबल को|                  
  • जिस मुग़ल सेना ने 1620 ई मे काँगड़ा किले को अपने अधीन किया था उसका कमांडर कौन था ...नवाब अलीखान
  • काँगड़ा के शासक जयचंद को किस मुग़ल बादशाह ने कैद कर लिया था ...अकबर|                               
  • मुग़ल साम्राज्य के विघटन के बाद किस शासक ने अपने राज्य का विस्तार किया ...राजा घमंडनड|  
  • किस नगर  में जहांगीर ने किले के अंदर मस्जिद बनवाई...नगरकोट|                     
  • मुग़ल साम्राज्य के पतन और पंजाब पर अफगानों की 1752 में पकड़ के बाद पहाड़ी रियासतों पर किसकी सर्वश्रेष्ठता स्थापित हुई... अहमदशाह दुर्रानी|     
  • शाहजहां ने किस वर्ष नूरपुर के राजा जगत सिंह पठानिया को काँगड़ा का फौजदार नियुक्त किया...1640 में|        

सिख गुरु(1500ई. - 1708ई.) 

गुरुनानक देव जी - पहले सिख गुरु ने ज्वालामुखी, काँगड़ा, कुल्लू, लाहौल, चम्बा, केहलूर(बिलासपुर), सिरमौर, मंडी और सुकेत की यात्रा की| उनकी यात्रा के याद में स्बाथू(सोलन) की निकट जोहसर में गुरुद्वारा बना है| 
गुरु अर्जुन देव जी - पांचवे सिख गुरु ने अमृतसर में हरमंदिर साहिब के निर्माण के लिए पहाड़ी राज्यों से धन प्राप्त किया| कुल्लू, सुकेत,मंडी, चम्बा और हरिपुर के राजा गुरूजी के शिष्य बने| 
गुरु हरगोविंद जी -  छठे सिख नुरू ने केहलूर के राजा के भेंट किये हुए भू-भाग पर 1634ई. में किरतपुर शहर बसाया और बड़ी स्थापित की| 
गुरु तेगबहादुर जी - नवें सिख गुरु ने केहलूर की रानी से  प्राप्त 3 गाँव पर मखोवाल गाँव बसाया जो बाद में आनंदपुर साहिब के नाम से जाना जाने लगा| यह उनका निवास स्थान बना| 
गुरु गोविन्द सिंह जी - दसवें सिख गुरु का जन्म पटना साहिब में हुआ| उनके पिता गुरुतेग बहादुर सिंह जी को औरंगजेब ने दिल्ली के चांदनी चौक पर शहीद कर दिया| उनका लालन पालन आनंदपुर साहिब में हुआ|
         सिरमौर प्रवास - सिरमौर के राजा मेदनी प्रकाश के  गुरूजी नाहन आए| राजा ने उन्हें यमुना नदी के किनारे पौंटा साहिब में किल्ला बनाने के लिए भूमि प्रदान की| गुरुजी  1683 -1688  तक पौंटा में रहे और दशम ग्रन्थ की रचना की| उनका विशाल गुरुद्वारा पौंटा साहिब में स्थित है|गुरूजी ने सिरमौर के राजा मेदनी प्रकाश और गढ़वाल के राजा फतेहचंद के बीच मैत्री करवाई| 
          भंगानी युद्ध(1686 ई.) - गुरूजी और केहलूर के राजा भीमचंद के बीच सफ़ेद हाथी को लेकर मनमुटाव हुआ जिसे गुरूजी को असम के राजा के राजा रतनराय ने दिया था| 
          मंडी यात्रा - गुरूजी ने मंडी के राजा सिद्धसेन के बुलावे पर मंडी और कुल्लू की यात्रा की|
          खालसा पंथ की स्थापना - 13 अप्रैल 1699 , को वैसाखी के दिन गुरु गोविन्द सिंह जी ने 80 हजार सैनिकों के साथ आनंदपुर साहब में खालसा पंथ की स्थापना कर सिखों को एक सैन्य शक्ति के रूप में संगठित किया जिससे पहाड़ी राज्य डर गए| 
          आनंदपुर से दक्षिण प्रवास - 1703 ई. में पहाड़ी राजाओं और मुग़लों ने मिलकर आनंदपुर साहिब को घेर लिया| गुरु जी 1704 ई  में आनंदपुर साहिब छोड़कर नांदेड़ चले गए| उन्हें माधो सिंह वैरागी(बंदा बहादुर) का साथ मिला जिसे उन्होंने सिख पंथ का नेतृत्व करने और मुग़लों से बदला लेने के लिए उत्तर भारत भेजा| सरहिंद में गुरूजी के बेटों को शहीद कर दिया गया| गुरूजी की 1708 ई में नांदेड़ में पठान द्वारा धोखे से हत्या कर की गयी| 

बंदा बहादुर - बंदा बहादुर ने पंजाब के अनेक शहरों को लुटा व पंजाब के मुग़ल गवर्नर से भयंकर बदला लिया| बंदा बहादुर 1710 में नाहन पहुँचा, जहाँ से वह किरतपुर पहुँचा और केहलूर के राजा भीमचंद को अपना शिकार बनाया| मंडी के राजा सिद्धसेन और चम्बा के राजा ने बंदा बहादुर को कर देना स्वीकार कर लिया| बंदा बहादुर को 1715 ई  में पकड़ लिया गया और 1716 ई में फाँसी पर लटका कर शहीद कर दिया गया| बंदा बहादुर की मृत्यु के बाद सिख 12 मिस्लों में बँट गए| 
  • नेरटी की लड़ाई किन राज्यों के शासकों के बीच हुई थी...काँगड़ा-चम्बा   
  • पौंटा साहिब के गुरुद्वारे से कौन-सा सिख गुरु जुड़ा हुआ है...गुरु गोविन्द सिंह  
  • गुरु गोविन्द सिंह ने दशम ग्रन्थ की रचना किस शहर मे की  थी...पौंटा साहिब                     
  • किस सिख गुरु ने कहलूर की रानी से 3 गाँव लिए और मखोवाल गाँव (जो बाद मे आनंदपुर साहिब के नाम से जाना जाने लगा) को अपना निवास स्थान बनाया...गुरु तेगबहादुर      
  • पौंटा साहिब के समीप '' भंगानी साहिब की लड़ाई '' गुरु गोविन्द और...के राजा के बीच हुई ... बिलासपुर  के  राजा भीमचंद के बीच    
 

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