हिमाचल प्रदेश का प्राचीन इतिहास
- सिंधु सभ्यता के समय हिमाचल के निवासी - कोल, किरात, नाग , खस थे |
- कोल H.P. के मूल निवासी थे |
- किरात(मंगोल) कोल जाती के बाद यहाँ आने वाली दूसरी जाती थी| ऋषि वशिष्ट ने उन्हें शिशनदेव (लिंग देवता की पूजा करने वाले) कहा है | कालिदास के रघुवंश में किन्नरों का उल्लेख मिलता है |
- महाभारत में अर्जुन ने नाग राजा वासुकि के उलोपी नामक नाग कन्या से गन्धर्व विवाह(इस विवाह में वर-वधू को अपने अभिभावकों की अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। युवक युवती के परस्पर राजी होने पर किसी श्रोत्रिय के घर से लाई अग्नि से हवन करने के बाद हवन कुंड के तीन फेरे परस्पर गठबंधन के साथ कर लेने मात्र से इस प्रकार का विवाह संपन्न मान लिया जाता था।) किया था| वासुकि नाग की पूजा चम्बा , कुल्लू आदि में की जाती है|
- आर्यों की तीसरी शाखा जो मध्य एशिया से कश्मीर होते हुए पुरे हिमालय में फ़ैल गयी, खस जाती कहलायी|
- खसों का नाग जाती पर विजय के रूप में भुंडा उत्त्सव[निरमंड(कुल्लू)]मनाया जाता है|
- ऋग्वेद के अनुसार दस्यु राजा शांभर और आर्य राजा दिवोदास के बीच 40 वर्षों तक युद्ध हुआ | अंत में दिवोदास ने उधवरज नामक स्थान पर शांभर का वध कर दिया| ऋषि भारद्वाज आर्य राजा दिवोदास के मुख्य सलाहकार थे |
- ऋग्वेद के अनुसार दिवोदास के पुत्र सुदास का युद्ध दस आर्य तथा अनार्य राजाओं के बीच हुआ था, जिसे दशराग युद्ध कहा जाता है| सुदास की सेना का नेतृत्व उनके गुरु और मंत्री वशिष्ठ ने किया जबकि अन्य दस राजाओं का नेतृत्व विश्वामित्र ने किया | सुदास की सेना ने दस राजाओं की सेना को पराजित किया | यह युद्ध रावी नदी के किनारे हुआ था |
- मंडी को माण्डव्य ऋषि से , बिलासपुर को व्यास ऋषि से , निरमंड को परशुराम से , मनाली को मनु ऋषि से तथा कुल्लू घाटी में मणिकरण के पास स्तिथ वशिष्ठ कुंड गर्म पानी के चश्मे को वैदिक ऋषि वशिष्ठ से जोड़ा जाता है|
- जमदगिनी ऋषि को “जमलू देवता” के रूप में मलाणा(कुल्लू)गांव में पूजा जाता है|जमदगिनी ऋषि जिस स्थान पर निवास करते थे वह “जामु का टिब्बा” कहलाया| यह सिरमौर जिले के रेणुका के पास स्तिथ है| जमदगिनी ऋषि की पत्नी रेणुका थी| जमदगिनी ऋषि के पुत्र परशुराम का मंदिर रेणुका झील के पास स्तिथ है|
- ऋगवेद में हिमाचल को हिमवंत कहा गया है | भीमसेन ने वनवास काल में कुल्लू की कुल देवी हिडिम्बा से विवाह किया था| त्रिगर्त राजा सुशर्मा महाभारत युद्ध में कौरवों की और से लड़े थे|
- महाभारत में 4 जनपदों - त्रिगर्त, औदुम्बर, कुलिंद और कुलूत का विवरण मिलता है |
- औदुम्बर - महाभारत के अनुसार औदुम्बर विश्वामित्र के वंशज थे जो कौशिक गोत्र से संबंधित है | औदुम्बर राज्य के सिक्के काँगड़ा , पठानकोट , जवालामुखी, गुरदासपुर और होशियरपुर के क्षेत्रों में मिले हैं| ये लोग शिव की पूजा करते थे |
- त्रिगर्त - त्रिगर्त , रावी, व्यास और सतलुज नदियों के बीच का भाग था | सुशर्मा चंद्र ने काँगड़ा क़िला बनाया और नगरकोट को इसकी राजधानी बनाया| त्रिगर्त का उल्लेख पाणिनि के अष्टाध्यायी, कल्हण की राजतरंगिणी, विष्णु पुराण में भी हुआ है|
- कुल्लुत - कुल्लुत राज्य व्यास नदी के ऊपर का इलाका था| इसकी प्राचीन राजधानी नग्गर थी| कुल्लुत रियासत की स्थापना प्रयाग(इल्लाहाबाद) से आये वहिंगमणि पाल ने की थी |
- कुलिंद - यमुना नदी का पौराणिक नाम कालिंदी है और इसके साथ पड़ने वाले क्षेत्र को कलिंद कहा गया है|
- किस पुराण के अनुसार "जो व्यक्ति हिमाचल के बारे में सोचता है बिना उसे देखे वह काशी में की गयी पूजा से बड़ा फल प्राप्त करता है"........स्कन्द पुराण
- सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान कौन सी पुरानी जनजाति निवास करती थी......दस्यु
- उत्तर भारत के निवासियों को वैदिक आर्य किस अपमानसूचक नाम से पुकारते थे.......दस्यु
- त्रिगर्त दो भागों में बंटा हुआ था, एक नगरकोट तथा दूसरा ......जालंधर
- ऋग्वेद में वर्णित दस राजाओं के युद्ध दशराग में किस राजा को विजय मिली......सुदास
- किरात राजा शंभर के विरुद्ध युद्ध के समय आर्य राजा दिवोदास के मुख्य सलाहकार कौन ऋषि थे..... भारद्वाज
- किन छे: गणराज्यों के समूह का महाभारत व् अन्य पुस्तकों में वर्णन मिलता है....त्रिगर्त षष्ठ
- हिमाचल क्षेत्र पर सबसे पहले आकर्मण करने वाली विदेशी जाती कौन सी थी...आर्य
- आर्यों के राजा दिवोदास के साथ युद्ध में शंभर का सहायक कौन था....वर्ची
- महाभारत के युद्ध में कौरव पक्ष की और से लड़ने वाला राजा सुशर्मा काँगड़ा (हिमाचल प्रदेश) के एक महत्वपूर्ण राजवंश का संस्थापक माना जाता है| यह राजवंश किस नाम से अभिज्ञात है .....कटोच
- हिमाचल प्रदेश की दूसरी सबसे पुरानी पहाड़ी रियासत कौन सी थी....कुल्लुत
- कुलिंद स्थाई रूप से कहाँ निवास करते थे......शिमला और सिरमौर
- प्रसिद्ध भाषाविज्ञानी ग्रियर्सन के अनुसार हिमालयन भूभाग के प्रथम परिचित 'इंडो आर्यन्स' कौन से थे.......खस
मौर्य काल
- सिकंदर ने 326 BC के समय भारत पर आकर्मण किया और व्यास नदी तक पहुँच गया | सिकंदर के सैनिकों ने व्यास नदी के आगे जाने से इंकार कर दिया , इसमें सबसे प्रमुख उसका सेनापति कोइनोस था|
- सिकंदर ने व्यास नदी के तट पर अपने भारत आकर्मण की निशानी के तौर पर बारह स्तूपों का निर्माण करवाया था जो अब नष्ट हो चुके हैं|
- चंदरगुप्त मौर्य ने पहाड़ी राजा पर्वतक( त्रिगर्त नरेश ) और अपने प्रधानमंत्री चाणकय के साथ मिलकर मौर्य राज्य की स्थापना की|
- चंदरगुप्त मौर्य के पोते अशोक ने मझिम और 4 बौद्ध खिक्षुओं (कस्सपगोटा, धुन्धीभीसारा, सहदेव, मूलकदेव) को हिमालये में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भेजा|
- ह्वेनसांग के अनुसार अशोक ने कुल्लू के कल्थ और काँगड़ा के चैतडू में बौद्ध स्तूपों का निर्माण करवाया| हिमाचल में 242 BCमें ही बौद्ध धर्म का प्रवेश हो गया था|
- भारत आकर्मण के बीच में सिकंदर को व्यास नदी को पार किए बिना स्वदेश लौटने के लिए कौन सा कारण जिम्मेवार था....ज्योतिषियों द्वारा मना करना|
- सिकंदर ने भारत विजय के अंतिम बिंदु की पहचान के लिए क्या किया....50 क्यूबिक ऊंचाई की वर्गाकार पत्थरों की 12 वेदियाँ व्यास नदी के ऊपरी तट पर बनवायी|
- अपने प्राचीनतम ढांचे के लिए प्रसिद्ध गांव जिसका नाम सिकंदर महान से जोड़ा जाता है...मलाणा|
- अशोक द्वारा हिमाचल प्रदेश की पौंटा घाटी में निर्मित एक स्तूप को एक मुस्लमान शासक ने दिल्ली में कहाँ स्थान्तरित किया .......फिरोजशाह कोटला|
गुप्तकाल:-
- श्रीगुप्त के पोते चंदरगुप्त प्रथम ने 319 AD में गुप्त साम्राज्य की नींव रखी| “भारत के नेपोलियन समुद्रगुप्त” ने 340 ई में पर्वतीय जनपदों को जीतकर उन पर अपना आधिपत्य जमाया|
- कुमारगुप्त के पुत्र स्कन्दगुप्त ने हूणों को पराजित कर गुप्त साम्राज्य की प्रतिष्ठा को बनाए रखा| कालिदास ने कुमारसम्भव और मेघदूत की रचना इसी काल में की थी जिसमे हिमालय का वर्णन मिलता है|
- समुद्रगुप्त ने किस शताब्दी में हिमाचल प्रदेश के नवगठित राज्यों को अपने अधीन किया था .....चौथी शताब्दी|
- समुद्रगुप्त ने किस वर्ष हिमाचल प्रदेश के स्थानीय शासकों को अपनी प्रभुता स्वीकार करने की चुनौती भेजी थी ...340 ई.|
गुप्तोत्तर काल (हूण, हर्षवर्धन)
- 521 ई में हूणों ने तोरमाण के नेतृत्व में पशिचमी हिमालय पर आकर्मण किया| तोरमाण के पश्चात उसके पुत्र मिहिरकुल जिसे “भारत का एटिला” कहा जाता था, ने 525 ई में पंजाब से लेकर मध्य भारत तक के क्षेत्र पर आधिपत्य जमा लिया| गुज्जर स्वयं को हूणों के वंशज मानते हैं|
- हर्षवर्धन 606 ई में भारत की गद्दी पर बैठा| उसके शासनकाल में ह्वेनसांग ने भारत की 629 - 644 ई तक यात्रा की| ह्वेनसांग 635 ई में जालंधर (जालंधर- त्रिगर्त की राजधानी) आया और वहां के राजा उत्तीतस का 4 माह तक मेहमान रहा| भारत में चीन वापसी के समय 643 ई में भी वह जालंधर में रुका था| ह्वेनसांग ने जालंधर के बाद कुल्लू, लाहौल और सिरमौर की यात्रा की थी| हर्षवर्धन की 647 ई में मृत्यु हो गई|
- चीनी यात्री ह्वेनसांग के अनुसार सन 500 में कुल्लू पर किसका शासन था...विहीनगमनी पाल|
- फरिश्ता के अनुसार कन्नौज के किस राजा द्वारा नगरकोट के राजा को पराजित करने के बारे में कहा जाता है .... हर्षवर्धन
- 500 ई में किस हूण शासक ने हिमाचल प्रदेश सहित भारत में जनजीवन को अस्त व्यस्त कर दिया था...तोरमाण
- तोरमाण कौन था...पांचवी शताब्दी का एक हूण आक्रमणकारी व् शासक|
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