सिंधु सभ्यता के समय हिमाचल के निवासी - कोल, किरात, नाग , खस थे | कोल H.P. के मूल निवासी थे | किरात(मंगोल) कोल जाती के बाद यहाँ आने वाली दूसरी जाती थी| ऋषि वशिष्ट ने उन्हें शिशनदेव (लिंग देवता की पूजा करने वाले) कहा है | कालिदास के रघुवंश में किन्नरों का उल्लेख मिलता है | महाभारत में अर्जुन ने नाग राजा वासुकि के उलोपी नामक नाग कन्या से गन्धर्व विवाह(इस विवाह में वर-वधू को अपने अभिभावकों की अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। युवक युवती के परस्पर राजी होने पर किसी श्रोत्रिय के घर से लाई अग्नि से हवन करने के बाद हवन कुंड के तीन फेरे परस्पर गठबंधन के साथ कर लेने मात्र से इस प्रकार का विवाह संपन्न मान लिया जाता था।) किया था| वासुकि नाग की पूजा चम्बा , कुल्लू आदि में की जाती है| आर्यों की तीसरी शाखा जो मध्य एशिया से कश्मीर होते हुए पुरे हिमालय में फ़ैल गयी, खस जाती कहलायी| खसों का नाग जाती पर विजय के रूप में भुंडा उत्त्सव[निरमंड(कुल्लू)]मनाया जाता है| ऋग्वेद के अनुसार दस्यु राजा शांभर और आर्य राजा दिवोदास के बीच 40 वर्षों तक युद्ध हुआ | अंत में दिवोदास ने उधवरज नामक स्थ...