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हिमाचल प्रदेश का मध्यकालीन इतिहास

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मध्यकालीन आक्रमणकारी:-  महमूद गजनवी - मेहमूद गजनवी ने भारत  पर 17 आकर्मण किए थे| महमूद गजनवी ने 1099 ई. में आनंदपाल को हारने के बाद नगरकोट पर आकर्मण किया और उसके खजाने को लूटा | नगरकोट किल्ले पर तुर्कों पर कब्ज़ा 1043 ई. तक रहा जिसके बाद दिल्ली के तोमर राजा महिपाल ने नगरकोट से गजनवी शासन की समाप्ति की| 

हिमाचल प्रदेश का प्राचीन इतिहास

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सिंधु सभ्यता के समय हिमाचल के निवासी - कोल, किरात, नाग , खस थे | कोल H.P. के मूल निवासी थे | किरात(मंगोल) कोल जाती के बाद यहाँ आने वाली दूसरी जाती थी| ऋषि वशिष्ट ने उन्हें शिशनदेव (लिंग देवता की पूजा करने वाले) कहा है | कालिदास के रघुवंश में किन्नरों का उल्लेख मिलता है | महाभारत में अर्जुन ने नाग राजा वासुकि के उलोपी नामक नाग कन्या से गन्धर्व विवाह(इस विवाह में वर-वधू को अपने अभिभावकों की अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। युवक युवती के परस्पर राजी होने पर किसी श्रोत्रिय के घर से लाई अग्नि से हवन करने के बाद हवन कुंड के तीन फेरे परस्पर गठबंधन के साथ कर लेने मात्र से इस प्रकार का विवाह संपन्न मान लिया जाता था।) किया था| वासुकि नाग की पूजा चम्बा , कुल्लू आदि में की जाती है| आर्यों की तीसरी शाखा  जो मध्य एशिया  से कश्मीर होते हुए पुरे हिमालय में फ़ैल गयी, खस जाती कहलायी| खसों का नाग जाती पर विजय के रूप में भुंडा उत्त्सव[निरमंड(कुल्लू)]मनाया जाता है| ऋग्वेद के अनुसार दस्यु राजा शांभर और आर्य राजा दिवोदास के बीच 40 वर्षों तक युद्ध हुआ | अंत में दिवोदास ने उधवरज नामक स्थ...

हिमाचल प्रदेश के इतिहास के स्त्रोत

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अष्टाध्यायी (अष्टाध्यायी = आठ अध्यायों वाली) महर्षि पाणिनि द्वारा रचित संस्कृत व्याकरण का एक प्राचीन ग्रंथ है|  राजतरंगिणी, कल्हण द्वारा रचित एक संस्कृत ग्रन्थ है। 'राजतरंगिणी' का शाब्दिक अर्थ है - राजाओं की नदी, जिसका भावार्थ है - 'राजाओं का इतिहास या समय-प्रवाह'|  'तारीखे फ़ोरोज़शाही' और "तारीख ए फरिश्ता" में नगरकोट किले  पर फिरोजशाह तुगलक के हमले का प्रमाण मिलता है|            औदुम्बरों के सिक्कों पर त्रिशूल और बैल के चित्र मिले हैं| ताबो गांव(लाहौल एवं स्पीति) से वर्षों पुरानी ममी 1967 में  प्राप्त हुई| पहाड़ी राज्यों की वंशावली की तरफ सबसे  पहले ध्यान आकर्षित करने वाले विद्वान विलियम मूरक्राफ्ट थे| किस रियासत के पास 150 से अधिक ताम्र पत्र स्वत्व संलेख हैं......चम्बा| एक ताम्रपत्र के अनुसार विक्रमी संवत 1717 चम्बा शहर, शक संवत के अनुसार किस वर्ष में पड़ेगा......1582| चकली ताम्बे के सिक्के जो 10वीं शताब्दी के आसपास मौजूद थे  किस क्षेत्र से सम्बन्धित थे....HP सोहन घाटी जो 40 हजार वर्ष पूर्व पुराने  ...